भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 32
क्षात्र की आवश्यकता समुचित रुप से युद्ध तथा शांति, दोनो समय में होती है। इसके अनेक उदाहरण हम अपने देश के भूतकाल में देख सकते है। इसी क्षात्र के दर्शन महाभारत काल में कृष्ण और अर्जुन में होते है। युद्ध तथा शांति काल मे इसी प्रकार के क्षात्र संतुलन के दर्शन हम चन्द्रगुप्त मौर्य, पुष्यमित्र शुंग, समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, कुमारगुप्त, स्कंदगुप्त, पुलकेशी, शीलादित्य हर्षवर्धन, भोज, राजराज चोल, राजेन्द्र चोल, बुक्कराय, प्रौढ़देवराय, कृष्णदेवराय तथा छत्रपति शिवाजी में पाते हैं। इसे एक उच्च आदर्श माना गया है। हर किसी ने इस आदर्श के अनुसार जीवन को ढालने का प
