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भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 92

प्रारम्भ से ही वह मुस्लिम बादशाहों की गतिविधियों नियमों, उनके धार्मिक विश्वास, अन्याय, असहशीलता तथा अविश्वसनीय व्यवहार को देखता आया था जो अवगुण उन्हे इस्लाम के अनुयायी के रूप में प्राप्त हुए थे। वह शुरू से ही समझ चुका था कि इसे समाप्त करने हेतु राजपूतों, मराठाओं, सिखों, और जाटों का एक होना आवश्यक है तथा इसके लिए वह (जयसिंह) अथक प्रयास करता रहा। मुगल साम्राज्य का दरबारी होने का लाभ लेते हुए जयसिंह ने राजपूतों और मराठाओं के मध्य विशेष संबंध स्थापित करने में सफल मध्यस्थता की थी। अपनी इस चतुराई के कारण एक ओर उसे पेशवाओं का तथा दूसरी ओर मुगल शासकों का समर्थन प्राप्त

Kṣāttra Rites - 4

(3) Jaya, Abhyātāna, and Rāṣṭrabhṛt

The Jaya, Abhyātāna, and Rāṣṭrabhṛt offerings are offerings given in Somayāgas. They are optional in the Vājapēya, Rājasūya, and Aśvamēdha. Kumārila-bhaṭṭa, however, opines that the above three homas are to be performed as a subsidiary to Darśapūrṇamāsa and similar śrauta rites[1].

Saṃskṛta-nāṭaka - Bhaṭṭa-nārāyaṇa (Part 2)

The Veṇī-sāṃhāra is, thus, a play that encompasses the story starting from Kṛṣṇa-sandhāna to Duryodhana-saṃhāra. The poet has displayed great skill in condensing this long story into a play –he has ensured that the story is engaging and that the characters are presented well. His creative talent, we may say, is on par with that of Bhāsa and Viśākhadatta in this sense – they have the skill of narrating a long tale in the form of a play. Though Bhaṭṭa-nārāyaṇa is similar to them in many cases, he is slightly inferior in certain ways.

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 91

औरंगजेब की मृत्यु के बाद मराठा, राजपूत, सिख और शक्ति संपन्न हो गये। सनातन धर्म का पुनर्जागरण होने लगा। नादिरशाह सतत रुप से दिल्ली के कमजोर शासको को इस स्थिति की चेतावनी देता रहा था। यह दक्षिण के निजाम का अहंकार था जिसने नादिरशाह जैसे लुटेरे आक्रांता को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया। इसी प्रकार टीपू ने भी पठानों को भारत पर आक्रमण हेतु आमंत्रित किया था। यह सब कृत्य इस्लाम की प्रकृति के अनुसार उसके मानने वालों द्वारा स्वाभाविक रूप से किये जाते रहे – इतिहास के अध्येताओं के लिए उनके द्वारा इस्लाम को न मानने वालों लोगों पर किस तरह विभिन्न तरीकों से हिंसात्म

Kṣāttra Rites - 3

Vaidika Abhicāras

The abhicāras in the Vedas can be divided into three types: (1) Sāmānya-abhicāras, (2) Viśēṣa-abhicāras, and (3) Abhicāra-Soma-yāgas.

Sāmanya-abhicāras:

These are the abhicāras that are a subsidiary of a principal rite. Some of these are obligatory, while the majority are optional rites.

भारतीय क्षात्त्र परम्परा - Part 90

पंद्रहवीं शताब्दी में शेख निजामुद्दीन औलिया लिखते है कि इस्लाम के धर्मोपदेश से हिंदुओं के विचारों को नहीं बदला जा सकता है। निम्नतम स्तर के लोगों को भी अपनी जाति पर गर्व था। दुख प्रकट करते हुए औलिया कहते है कि वे धर्मान्तरण के लिए तैयार ही नहीं होते हैं।

Kṣāttra Rites - 1

Preface

(Maṅgalam)

सामोपायनयप्रपञ्चपटवः प्रायेण ये भीरवः

शूराणां व्यवसाय एव हि परं संसिद्धये कारणम्।

विस्फूर्जद्विकटाटवीगजघटापीठैकसञ्चूर्णन-

व्यापारैकरसस्य सन्ति विजये सिंहस्य के मन्त्रिणः ॥

~ Subhāṣitaratnabhāṇḍāgāra, 2nd Prakaraṇa, Vīra-praśaṁsā