April 2024

ऐसी ही घटना को आज हम गांधी-नेहरु काल में देख रहे हैं – यदि नेहरु जैसा व्यक्ति गांधी का उत्तराधिकारी हो सकता है तो यह गांधी के सिद्धांतों की वास्तविकता को दर्शाता है। जब हम देखते हैं कि किस प्रकार सुभाषचंद्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल और राजगोपालाचारी जैसे सुयोग्य व्यक्तियों पर दबाव डाल कर उन्हे हटा दिया गया तो यह स्पष्ट हो जाता है कि गांधी किसके पक्ष का समर्थन जुटाने में संलिप्त थे। भूतपूर्व जोधपुर विश्व विद्यालय के दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक डा....
Himalaya
Vedanta is not antithetical to Christism or Islam. Even if we say that divine principle resides outside man, Vedanta does not say that it is wrong. antarbahiśca tatsarvaṃ vyāpya nārāyaṇaḥ sthitaḥ । -Mahānārayaṇopaniṣad 13.5 If someone believes that Vaikunṭha is a separate world away from himself, let him believe that. There is no harm in that. A man who now sees Vaikunṭha outside might be able to see it within himself at some later point in...
Himalaya
प्रकाराः दत्तपदीयं द्विप्रकारा सुकरा दुष्करा चेति । एतौ प्रकारौ सुयोज्या दुर्ज्योज्या चेत्यपि शक्यौ वक्तुम् । असौ तावदत्राभिप्रायः । सुकरदत्तपदी - यदि दत्तानि पदानि निर्दिष्टे विषये भाषायां च सुखेन योजयितुं शक्यानि तर्हि सा सुकरदत्तपदी । यथा वर, कर, चिर, सुर चेति । एषां पदानां संस्कृतपद्ये निवेशो नितान्तं सुशकः । तदाकारकाणां शब्दानां संस्कृते सहजतया उपलभ्यत्वात् । दुष्करदत्तपदी - यदि तु दत्तानि पदानि निर्दिष्टे विषये भाषायां च नतमां घटन्ते तर्हि...
Upa-rūpakas The Sāhitya-darpaṇa defines eighteen uparūpakas namely, nāṭikā, troṭaka, goṣṭhī, saṭṭaka, nāṭya-rāsaka, prasthāna, ullāpya, kāvya, preṅkhaṇa, rāsaka, saṃlāpaka, śrīgadita, śilpaka, vilāsikā, durmallikā, prakaraṇī, hallīśa, bhāṇikā Nāṭikā – The storyline of a nāṭikā is kalipta, i.e., imagined and created by the playwright. A  nāṭikā consists of four acts and female characters paly prominent roles. The hero is a king who is...
Ḍima – A ḍima is based on prakhyāta-vastu, i.e., a popular story. It is filled with supernatural and magical elements; eclipses and wars also come as a part of this genre of play. Radura is the primary rasa. The play is completely devoid of śānta, hāsya, and śṛṅgāra rasas. A ḍima typically consists of four aṅkas; connecting segments such as the viṣkambhaka and praveśaka are absent. Devas, gandharvas, yakṣas, rākṣasas, uragas, bhūtas, pretas and...
Nature
अशोक की अहिंसा नीति का आकलन इत् सिंग जैसे चीनी यात्री के अभिलेखानुसार अशोक एक सन्यासी तथा बौद्ध भिक्षु था। उनके कथनानुसार उन्होने ऐसी प्रतिमा के दर्शन भी किये हैं। बौद्ध व्यवस्था में कोई भी सन्यासी पुनः गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर सकता है। वे किसी भी अन्य आश्रम में प्रवेश कर सकते है। फाहियान, ह्वेन त्सांग, इत् सिंग, धर्मस्वामी तथा अन्य बौद्ध चीनी यात्रियों ने भारत की यात्रा की थी। अनेक अवसरों पर उनके कथन अपनी धार्मिक आस्था से प्रेरित भावना से अथवा...
Thoughts on the Three Matas It has become common practice among us — notably among Brahmins — and especially among those who think they have understood the essence of a mata, to argue whether it is Dvaita, Advaita or Viśiṣṭādvaita, when they are faced with the prospect of understanding philosophical texts such as the Gītā or the Upaniṣads. When I translated Vedic texts such as the Puruṣa-sūkta into Kannada, many people would ask me this same...
Ocean
ಭಂಗೀಭಣಿತಿ ಎಷ್ಟೋ ಬಾರಿ ಮಹಾಕವಿಗಳು ತಮ್ಮ ಕಾವ್ಯದ ನಡುವೆ ಪ್ರೌಢವೂ ಸಾಭಿಪ್ರಾಯವೂ ಆದ ಹೇಳಿಕೆಗಳನ್ನು ಮಾಡುವುದುಂಟು. ಇವುಗಳೆಲ್ಲ ಕಟ್ಟಕಡೆಗೆ ರಸಧ್ವನಿಯಲ್ಲಿ ಪರ್ಯವಸಿಸುತ್ತವೆಂಬುದು ಸತ್ಯ. ಆದರೆ ರೂಪದ ಮಟ್ಟಿಗೆ ಇವನ್ನು ನಿರ್ದಿಷ್ಟವಾದ ಒಂದು ಸ್ಫುಟಾಲಂಕಾರದಲ್ಲಿ ಅಳವಡಿಸಲಾಗುವುದಿಲ್ಲ; ಲಕ್ಷಣೆ ಮತ್ತು ವ್ಯಂಜನೆಗಳಿಗೂ ನೇರವಾಗಿ ತಳುಕು ಹಾಕಲು ಅನುಕೂಲಿಸುವುದಿಲ್ಲ. ಇಂಥವನ್ನು ಕುಂತಕನ ಮಾತಿನಂತೆ ‘ಭಂಗೀಭಣಿತಿ’ ಎನ್ನಬಹುದು. ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ಡಿ.ವಿ.ಜಿ., ಕುವೆಂಪು, ಪುತಿನ ಮೊದಲಾದವರಲ್ಲಿ ಇವನ್ನು ಹೇರಳವಾಗಿ ಕಾಣಬಹುದು. ಪೈಗಳೂ ಇವರ ಸಾಲಿಗೆ...
Nāṭaka, prakaraṇa, bhāṇa, prahasana, ḍima, vyāyoga, samavakāra, vīthi, aṅka, and īhāmṛga – these constitute the ten rūpakas, i.e., the ten different genres of Sanskrit drama. The following are their main features as per the Nāṭyaśāstra and Sāhitya-darpaṇa. Nāṭaka – The vastu (theme) of a nāṭaka is required to be prakhyāta, i.e., must be a popular one. This kind of rūpaka is required to contain stories that capture happiness, sadness,...
बुद्ध द्वारा प्रतिपादित सातगुण – सप्तशील लिच्छवियों के प्रश्न के प्रति उत्तर में बुद्ध ने उन्हे सात सिद्धांतों का उपदेश दिया। इस विषय पर महान राष्ट्रप्रेमी और विद्वान सीताराम गोयल ने एक बहुत सुन्दर उपन्यास हिन्दी भाषा में लिखा है जिसका शीर्षक सप्तशील है[1]। बुद्ध ने लिच्छवियों को सन्बोधित करते हुए कहा “जब तक आप सब एकता के साथ खडे रहेंगे तब तक आपकी स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहेगी। आपकी स्वतन्त्रता तब तक बनी रहेगी जब तक आप अपने आन्तरिक मतभेदों को...